khabar Chor: हम पहले भी बेशर्म थे, इधर कुछ ज्यादा हो गए हैं।: एक मित्र हैं मेरे नीरज सिंहा जी , बेबाकी इनकी पहचान है । जो सही है वह चाहे कितना भी कडवा हो बोल देते हैं । कागजी शेर नही हैं , जमीन पर सं...
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khabar Chor: हम पहले भी बेशर्म थे, इधर कुछ ज्यादा हो गए हैं।
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