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Nandita Mahtani hosts a birthday party for Tusshar Kapoor

http://www.sakshatkar.com/2017/11/nandita-mahtani-hosts-birthday-party.html

पत्रकार को गोली मार दी

जब पुलिस हरामीपन पर उतर आये तो जिन्दा को मुर्दा और मुर्दा को जिन्दा कर सकती है . भ्रष्टतम विभागों में से एक पुलिस विभाग है जो अपने कारनामो के लिए जाना जाता है . जब नक्सली नेता को मारने के चक्कर में इन पुलिस वालों ने एक पत्रकार को भी मार डाला. आखिर क्या लिखा जाये इन खाकी के लिए ?
पिथौरागढ़ के पत्रकार हेम को मार डाला
शीर्ष माओवादी नेता चेरूकुरी राजकुमार उर्फ आजाद को आदिलाबाद में हुई मुठभेड़ में शुक्रवार को मारकर आंध्रप्रदेश पुलिस खुश हो रही थी। अब उसकी खुशी काफूर हो सकती है। आजाद के साथ कथित तौर पर मारे गए दूसरे नक्सली नेता को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है। पहले जिस दूसरे माओवादी को सुखदेव बताया जा रहा था, अब वह उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का एक पत्रकार हेमचंद्र पांडेय कहा जा रहा है।
आजाद के साथ मारे गए दूसरे नक्सली के शव का फोटो देखकर पिथौरागढ़ में रह रहे पांडेय के परिवार ने शनिवार को दावा किया है कि वह सुखदेव न होकर हेमचंद्र है। हालांकि इस पर अभी आंध्र पुलिस की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इधर, आजादी बचाओ आंदोलन के बनवारी लाल शर्मा ने नक्सलियों के साथ बातचीत की सरकार की मंशा पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया कि नक्सलियों से बातचीत की पेशकश का आजाद ने सकारात्मक संकेत दिया था। इसी आजाद को पुलिस ने मुठभेड़ में मारा है। आजाद पर 12 लाख का इनाम था। शर्मा के मुताबिक आजाद ने बातचीत शुरू करने के लिए पोलित ब्यूरो के चार सदस्यों को जमानत पर रिहा करने की शर्त रखी थी। उन्होंने कहा कि आजाद को मारकर सरकार ने नक्सलियों के साथ बातचीत की सारी संभावनाओं पर पानी फेर दिया।
देवलथल के पास छिपक्या गांव का निवासी था हेमचंद्र : पिथौरागढ़ से मिली जानकारी के अनुसार, आजाद के साथ मारा गया हेमचंद्र मूलरूप से देवलथल के निकटवर्ती छिपक्या गांव का निवासी था। उसकी प्रारंभिक शिक्षा देवलथल से हुई। उसने हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा राजकीय इंटर कालेज देवलथल से हासिल की। उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए वह पिथौरागढ़ आया, जहां पर उसने एमए किया। उसने स्नातकोत्तर कॉलेज में छात्र संघ चुनाव भी लड़ा, जिसमें उसे सफलता नहीं मिली। हेम उत्तराखंड राज्य आंदोलन में भी सक्रिय रहा। एमए की शिक्षा पूरी करने के बाद वह भूमिगत हो गया था। इससे पूर्व उसका विवाह भी स्थानीय युवती से हुआ था। इसके बाद वर्षो तक वह जिले में कहीं नजर नहीं आया। करीब चार साल पहले अपने पिता की मृत्यु के बाद वह अपने गांव आया था।
वामपंथी विचारों से प्रभावित था हेमचंद्र : देहरादून से जुटाई गई जानकारी के मुताबिक, हेमचंद्र वामपंथी विचारों से गहराई से प्रभावित था। गढ़वाल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद उसने एक वामपंथी पत्रिका का संपादन भी किया। हालांकि, पुलिस उसके किसी आपराधिक या नक्सली घटना में शामिल होने के रिकॉर्ड से इन्कार कर रही है। बताया जाता है कि हेमचंद पांडे के बारे में जानकारी जुटाने के लिए आंध्र प्रदेश पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस से संपर्क साधा है। एसपी पिथौरागढ़ नीलेश भरणे के मुताबिक, पिथौरागढ़ पुलिस के पास उसके किसी आपराधिक घटनाक्रम में शामिल होने का रिकॉर्ड नहीं है। वहीं, राज्य के गृह विभाग के प्रमुख राजीव गुप्ता के मुताबिक इस संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। साभार : दैनिक जागरण

Man killed with Azad a journalist
The man killed with Maoist leader Azad in an encounter yesterday was a freelance Hindi journalist who was interviewing him, Andhra Pradesh police have said a day after wrongly identifying the second victim as a guerrilla named Sahdev. The family of Maoist sympathiser and Uttarakhand-based journalist Hemachandra Pandey, 35, had earlier got in touch with rights activists such as poet Varavara Rao in Andhra after seeing his pictures in newspapers, captioned “Sahdev”.
In the 1990s, the police had shot dead an Urdu journalist, Gulam Rasool, along with a Maoist whom he was interviewing on Hyderabad’s outskirts. Cherukuri Rajkumar alias Azad, the Maoist No. 3, was camping with 20-25 guerrillas on a hillock in the Wankhidi forests of Adilabad to be interviewed by Pandey, a senior district police officer said.
Police patrols, tipped off about a Maoist leader’s visit, surrounded the hideout after noticing movements through their night-vision binoculars, he said. “When the guerrillas refused to surrender and began shooting, the police retaliated. The rest of the Maoists ran away after they found their leader shot along with the interviewer.” Uttarakhand police, who have carried out a probe on a request from their Andhra counterparts, said Pandey had left his home in Pithoragarh, Kumaon, for Nagpur in Maharashtra on June 30 to do the interview. He apparently boarded a train from Haldiwani station, travelled to Delhi and then on to Nagpur.
Some of his friends and a brother, who is also a journalist, knew he was going on an assignment for a newspaper and a news channel, says the Uttarakhand police report that has been handed to the state government in Dehra Dun. The newspaper and the channel have denied commissioning any such interview. Azad’s mother Karuna and the Maoists have alleged that Azad was arrested with another person on Thursday at Bitaburdi in Nagpur — where he had gone to take political classes for cadres — brought to Adilabad and shot in a fake encounter.
“My husband had informed me about his visit to Nagpur for a scoop but did not tell us about the interview with Azad,” Pandey’s wife Babita, who reached Hyderabad this evening to receive the body, said. “We were aghast to see his photo in the newspapers this morning.” An officer in Adilabad said Pandey was identified as a freelance journalist from the visiting cards found in his pocket. “He did not have any accreditation card from any state government.” Andhra home minister Sabita Indra Reddy said: “How can one identify a journalist in pitch darkness on a remote hillock without any ID card?”
Pandey, a resident of Deventhal village, 23km from Pithoragarh town, had dabbled in Left politics as a college student. He later developed contacts among the rebels who would often sneak into Pithoragarh from across the Nepal border, an officer in Pithoragarh said. “He wrote articles on the rebels’ activities for various newspapers and periodicals.” A journalist in Pithoragarh said: “Pandey has been in the profession for seven years. He was never afraid to express his ideology.”
The Pithoragarh SP later told a TV channel that Pandey was not a journalist any more because he had not written anything recently for any publication. Local sources, however, said Pandey had got articles published recently in minor journals. They said Pandey did not have official accreditation as a journalist but carried out assignments for media houses.
साभार : द टेलीग्राफ

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